प्रदेश में नगरीय निकायों में सफाईकर्मियों की भर्ती को लेकर लंबे समय से चल रही अनिश्चितता पर राजस्थान हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने 309 नगर निकायों में 23,820 पदों पर पिछले 14 वर्षों से भर्ती नहीं होने पर नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है और तीन सप्ताह के भीतर स्पष्ट जवाब देने के निर्देश दिए हैं। यह मामला उन हजारों अभ्यर्थियों से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अब तक नियुक्ति नहीं मिलने की शिकायत की है।
जानकारी के अनुसार 380 से अधिक याचिकाकर्ताओं ने अदालत में याचिका दायर कर यह मांग की है कि उन्हें अन्य निकायों की तरह नियुक्ति दी जाए। याचिकाकर्ताओं में जयपुर नगर निगम, राजगढ़, राजाखेड़ा नगर पालिका और ब्यावर सहित कई अन्य क्षेत्रों के अभ्यर्थी शामिल हैं।
याचिका में यह भी कहा गया है कि जहां-जहां पद रिक्त हैं, वहां तुरंत प्रभाव से नियुक्तियां की जाएं, ताकि वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे उम्मीदवारों को राहत मिल सके। अदालत ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए यह जानना चाहा है कि भर्ती प्रक्रिया में देरी के पीछे क्या कारण हैं और इसे कब तक पूरा किया जाएगा।
अलवर के याचिकाकर्ताओं को आंशिक राहत
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता के अनुसार 30 दिसंबर 2025 को नियुक्ति आदेश जारी किए गए थे लेकिन इसके बावजूद नियुक्ति नहीं मिलने पर याचिका दायर करनी पड़ी। बाद में 9 जनवरी 2026 को दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया शुरू की गई, जिससे भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ी। इस पर अदालत ने अलवर के याचिकाकर्ताओं को फिलहाल याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए कहा कि यदि नियुक्ति नहीं मिलती है, तो वे पुनः अदालत का रुख कर सकते हैं।
इसी क्रम में अदालत ने जयपुर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन सहित अन्य चार निकायों के मामलों में प्रमुख शासन सचिव, स्वायत्त शासन विभाग, निदेशक डीएलबी और संबंधित आयुक्तों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि लंबित भर्तियों को लेकर जवाबदेही तय की जाएगी और जरूरत पड़ने पर आगे कड़े निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं।
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